Saturday, June 4, 2011

Friday, June 3, 2011

lalsingh: lalsinghबाबा रामदेव

lalsingh: lalsinghबाबा रामदेव: "नई दिल्ली। आज दोपहर वित मंत्री प्रणब मुखर्जी के घर पर एक बैठक होगी। इस बैठक में आज बाबा रामदेव को देने वाले नए ड्रॉफ्ट पर चर्चा की जाएगी। ..."

lalsinghबाबा रामदेव


नई दिल्ली। आज दोपहर वित मंत्री प्रणब मुखर्जी के घर पर एक बैठक होगी। इस बैठक में आज बाबा रामदेव को देने वाले नए ड्रॉफ्ट पर चर्चा की जाएगी। बाबा के आंदोलन को लेकर सरकार चिंतित हैं। इस बीच मानव संसाधन मंत्री ने कपिल सिब्बल ने थोड़ी देर पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से बातचीत की है। कहा जा रहा है कि दोनों की बैठक पहले से फिक्स थी।

बाबा ने कहा कि देशभर में कालेधन और भ्रष्टाचार की उनकी मुहिम में लाखों लोग शामिल हो रहे हैं। दिल्ली में उसकी झलक दिखनी भी शुरू हो गई है। वहीं कांग्रेस आलाकमान ने अपनी पार्टी के लोगों को बाबा रामदेव के खिलाफ कुछ भी बोलने से रोक दिया है। दूसरी तरफ आज रामलीला मैदान में लोग पहुंचने लगे हैं। महिलाएं भी भारी तादाद में पहुंच रही हैं।






बाबा रामदेव

वहीं जानकारों का कहना है कि बाबा का अनशन शुरू होता है तो दिल्ली में भीड़ को संभालने में मुश्किल होगी। वहीं, लोकपाल विधेयक पर सरकार के रुख से चोट खाई टीम अन्ना भी अब बाबा के साथ खुलकर खड़ी हो गई है।

वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए सरकार रामदेव को मनाने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती है। उसे डर है कि इस आंदोलन ने तेजी पकड़ी तो मुश्किल खड़ी हो जाएगी। पहले से ही परेशानियों से घिरी सरकार फिलहाल कोई और परेशानी मोल नहीं लेना चाहती है।

जहां सरकार बाबा रामदेव को मनाने की कोशिश में जुटी है। वहीं, कांग्रेस पार्टी को सरकार की ये कमजोरी रास नहीं आ रही है। कांग्रेस के नेता राशिद अलवी ने कहा कि बाबा को चाहिए कि सबसे पहले वो जो 11 हजार करोड़ उनके पास हैं उसका हिसाब देश के लोगों को दें।

सूत्रों की माने तो सरकार बाबा रामदेव से आमने सामने दो दो हाथ नहीं करना चाहती। इसीलिए दिग्गजों के बयान पर लगाम लगाया गया। अब सबकी नजर आज बाबा से होने वाली मंत्रियों की बैठक पर है, क्या इस बैठक में सरकार की परेशानी का हल निकलेगा।

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कालेधन के खिलाफ बाबा रामदेव के अनशन को कामयाब बनाने के लिए देश भर के अपने स्वयंसेवकों से बाबा के समर्थन में जुट जाने का फरमान जारी किया है। इस अंदेशे से कि कालेधन के विरोध में बाबा को अनशन पर बैठने से रोकने के लिये सरकार सभी हथकंडे अपना सकती है, आरएसएस योग गुरु के पीछे खड़ा हो गया है।
संघ की कार्यकारी समिति के सदस्य राम माधव ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा कि देश भर के स्वयंसेवकों को बाबा के आंदोलन का समर्थन करने के लिए कहा गया है। संघ कार्यकर्ता इस आंदोलन में हर स्तर पर इसमें अपनी भूमिका भी निभा रहे हैं। संघ की ओर से बाबा को परोक्ष रुप से ही सही मगर अन्ना हजारे के आंदोलन के सबक का ख्याल रखने की भी सलाह दी गई है।
संघ का मानना है कि सरकार ने अन्ना से लोकपाल विधेयक का वादा कर आंदोलन तो खत्म करवा लिया लेकिन जब काम करने का वक्त आया तो टाल मटोल कर रही है। राम माधव ने कहा कि बाबा रामदेव समझदार हैं और वह बात समझेंगे। सिर्फ चार नेता या मंत्री हवाई अड्डे पर जा कर मिल लें इससे काम नहीं चलेगा। सरकार को ठोस उपाय करने होंगे।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर यूपीए को घेरने में भाजपा की विफलता के सवाल पर राम माधव ने कहा कि भाजपा संसद के भीतर और बाहर अपना काम कर रही है। लेकिन इसमें समाजसेवी संगठनों और जनता का भी रोल है। राम माधव ने कहा कि सरकार का बाबा के आंदोलन को रोकना जनता की आवाज को रोकना होगा। राम माधव ने संघ की ओर से यह एलान किया कि बाबा के आंदोलन को तब तक समर्थन दिया जाता रहेगा जबतक सरकार भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करती।
नई दिल्‍ली। राजधानी के रामलीला मैदान पर शनिवार सुबह से शुरू होने वाले योग गुरु बाबा रामदेव के अनशन को लेकर केंद्र सरकार का तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकार ने बाबा को मनाने के लिए एक एग्रीमेंट तैयार किया है, जिसे बाबा के सामने शुक्रवार दोपहर को रखा जायेगा। शुक्रवार की सुबह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्‍बल ने मुलाकात की। इस मुलाकात में तय किया गया कि सिब्‍बल अन्‍य दो नेताओं के साथ दोपहर एक बजे बाबा.....

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(गुरूवार 7 मई 2009)
तब्बू 1-बी/301, ग्रीन एकड्‍स, लोखंडवाला कॉम्प्लेक्स, अंधेरी (पश्चिम), मुंबई-53 तनिशा उषा किरण एम.एल.धानुकर मार्ग मुंबई-26 तनूजा उषा किरण एम.एल.धानुकर मार्ग मुंबई-26

(बुधवार 6 मई 2009)
सलमान खान 3, गैलेक्सी अपार्टमेंट, बी.जे.रोड, बंद स्टैंड, बांद्रा (पश्चिम), मुंबई-50 समीरा रेड्डी 9/बी, चाँद टेरेस, सेंट एंड्रयूज रोड, होली फैमिली हॉस्पिटल के सामने, बांद्रा (पश्चिम), मुंबई-50 संजय दत्त 58, नरगिस दत्त रोड, पाली हिल, बांद्रा (पश्चिम), मुंबई-50

(मंगलवार 5 मई 2009)
माधुरी दीक्षित विजयदीप, तीसरी ‍मंजिल, आयरिस पार्क, जुहू, पोस्ट ऑफिस, एबी नायर रोड, मुंबई-49 मनीषा कोईराला 302, बीचवुड टावर्स, यारी रोड, वरसोवा अंधेरी (पश्चिम) मुंबई-61 मनोज कुमार 45, लक्ष्मी विला, ग्राउंड फ्लोर, टैगोर रोड, सांताक्रुज (पश्चिम), मुंबई-54

(मंगलवार 5 मई 2009)
जयाप्रदा 202, जुहू प्रिंसेस जुहू बीच, मुंबई-49 जया बच्चन 20, श्री कृष्णा अपार्टमेंट्‍स, तरुण प्रभात सोसायटक्ष, चकला, अंधेरी (ईस्ट), मुंबई-99

(शुक्रवार 16 जनवरी 2009)
डेज़ी ईरानी, दलिप ताहिल डैनी डेनजोंग्पा




आमिर खा
धारिया हाउस, फर्स्ट फ्लोर
7 वाँ रास्ता, खार (वेस्ट)
मुंबई - 52

आसिफ शेख
304/ए-1, मंगल नगर
बैंक ऑफ इण्डिया के सामने
यारी रोड, वर्सोवा, अंधेरी (वेस्ट) मुंबई - 61


अभिषेक बच्च
प्रतीक्षा, 10 वाँ रास्ता जेवीपीडी स्कीम
जुहू, मुंबई - 49

एडम बेदी
बी/4, बीच हाउस पार्क
गाँधीग्राम रोड जुहू, मुंबई - 49

अदिति गोवात्रिकर
502, मेरीवेल, सेंट एंड्रयू रोड,
बांद्रा (वेस्ट), मुंबई - 50

आदित्य पंचोली
हेट बंगला, गाँधीग्राम रोड
जुहू, मुंबई - 49

आफताब शिवदासानी
22, मिस्त्री कोर्ट, सीसीआई क्लब के सामने
चर्चगेट, मुंबई - 20

ऐश्वर्या रा
12, लामेर, कांदेश्वरी रोड माउंट मेरी,
बांद्रा (वेस्ट) मुंबई - 50

अजय देवग
ए/61, वर्षा, चौथा गुलमोहर एक्सटेंशन रोड
जेवीपीडी स्कीम जुहू, मुंबई - 49

आजिंक्य देव
ए-4, रितुराज अपार्टमेंट
एसएनडीटी कॉलेज के सामने,

नयी दिल्ली



सलमान के किरदार का कई फिल्मों में प्रेम नाम रहा है। ‘रेडी’ में वे फिर एक बार ‍प्रेम नामक चरित्र निभाकर दर्शकों का दिल जीतने का प्रयास करेंगे। ये प्रेम अपने पिता और चाचाओं की विशाल संपत्ति का एकमात्र वारिस है। दूसरे पिताओं की तरह प्रेम के पिता भी चाहते हैं कि उनका बेटा शादी कर सेटल हो जाए। उन्हें पोते-पोतियों के साथ समय बिताने का अवसर दे, लेकिन प्रेम को अपना सिंगल स्टेटस बहुत पसंद है। सिंगल रहने का वह भरपूर मजा लुटता है

Thursday, June 2, 2011

मनरेगा नहीं, धनरेगा कहि‌ए जनाबमनरेगा नहीं, धनरेगा कहि‌ए जनाब






मनरेगा नहीं, धनरेगा केन्द्र सरकार की एक अति महत्वाकांक्षी योजना जो कि गाँवों के उन गरीबों व असहायों के लिए चलायी जा रही है जिन्हें घर व गाँव छोड़कर रोजी-रोटी के लिए सुदूर किसी शहर में जाना पड़ता है । गाँव के इन जरूरतमन्दों को शहर न जाना पड़े और गाँव में ही काम मिल जाये, यही सोचकर यह योजना नरेगा जिसे अब मनरेगा के नाम से जाना जाता है, केन्द्र सरकार ने महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार को बड़े ही कुशलता के साथ चलाने का संकल्प लिया, लेकिन मनरेगा राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र सुल्तानपुर जनपद में धनरेगा बन गयी है । बात अगर सिर्फ जमओं ब्लाक की करें तो कोई ऐसा आदर्श तालाब किसी भी ग्राम सभा में नहीं बना जिसे हम आदर्श कह सकें, आदर्श की मिसाल कायम करने के लिए जो भी मानक दिये गये हैं, उनकी परवाह न करते हुए पहले से ही बड़े गड्‌ढे का रूप पाये उन जगहों को आदर्श तालाब बनाने का प्रयास किया गया है, जो कि पचास प्रतिशत पहले ही तालाब को कुछ परिश्रम करवाकर मनरेगा का धनरेगा करके कागजों पर पूरे मानक के साथ आदर्श तालाब बनवाये जा रहे हैं या बन गये हैं । जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ चन्द लोग जिसे प्रदेश व गाँवों के विकास का जिम्मा दिया गया । जिन्हें हम विकास की रीढ़ भी कह सकते हैं ये चन्द लोग अपने-अपने कमीशन के चक्‍कर में मनरेगा का धनरेगा करवाने में कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं । प्रधानों का कार्यकाल कहि‌ए जनाब


केन्द्र सरकार की एक अति महत्वाकांक्षी योजना जो कि गाँवों के उन गरीबों व असहायों के लि‌ए चलायी जा रही है जिन्हें घर व गाँव छोड़कर रोजी-रोटी के लि‌ए सुदूर किसी शहर में जाना पड़ता है । गाँव के इन जरूरतमन्दों को शहर न जाना पड़े और गाँव में ही काम मिल जाये, यही सोचकर यह योजना नरेगा जिसे अब मनरेगा के नाम से जाना जाता है, केन्द्र सरकार ने महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार को बड़े ही कुशलता के साथ चलाने का संकल्प लिया, लेकिन मनरेगा राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र सुल्तानपुर जनपद में धनरेगा बन गयी है । बात अगर सिर्फ जम‌ओं ब्लाक की करें तो को‌ई ऐसा आदर्श तालाब किसी भी ग्राम सभा में नहीं बना जिसे हम आदर्श कह सकें, आदर्श की मिसाल कायम करने के लि‌ए जो भी मानक दिये गये हैं, उनकी परवाह न करते हु‌ए पहले से ही बड़े गड्‌ढे का रूप पाये उन जगहों को आदर्श तालाब बनाने का प्रयास किया गया है, जो कि पचास प्रतिशत पहले ही तालाब को कुछ परिश्रम करवाकर मनरेगा का धनरेगा करके कागजों पर पूरे मानक के साथ आदर्श तालाब बनवाये जा रहे हैं या बन गये हैं । जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ चन्द लोग जिसे प्रदेश व गाँवों के विकास का जिम्मा दिया गया । जिन्हें हम विकास की रीढ़ भी कह सकते हैं ये चन्द लोग अपने-अपने कमीशन के चक्‍कर में मनरेगा का धनरेगा करवाने में को‌ई भी कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं । प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने में मात्र कुछ माह ही शेष है । उसके बावजूद अभी बहुत सारे तालाबों का कार्य शुरू ही हु‌आ है । बारिश का आगाज भी हो गया है । बारिश आ जाने पर कैसे पूरा होगा ये आदर्श तालाब इन अधूरे नव निर्मित तालाबों के बारे में जानकारी करने पर जानकार सूत्र कहते हैं कि लोग बरसात का इंतजार कर रहे हैं । जिससे बरसात का पानी तालाबों में भर जायेगा और मानक पूरा मनरेगा का धनरेगा करने में आसानी होगी ।

ज्यादातर तालाब अपनी जुबानी ही अपनी दास्ताँ बयां कर देंगे और यह साबित हो जायेगा कि मनरेगा का धन कैसे उड़ाया जा रहा है । तालाबों की बैरीकेटिंग भी इस हिसाब से की गयी है कि रेडीमेड पोल जो कि खड़े होने की जगह पड़े हैं देखने लायक है । कहीं-कहीं ईंटों की बेन्च भी टूटी पड़ी है और तालाबों में पानी की जगह अगर दिखायी पड़ सकती है तो उन मजदूरों के पसीनों की बूँदें जिसे सिर्फ अनुभव करके देखा जा सकता है ।

केन्द्रीय जांच टीम ने क‌ई ग्रामों के दौरे का निरीक्षण कर इस योजना के तहत हु‌ए कार्यों का खुलासा किया । मजदूरों की मजदूरी में भी घोटाला किया जा रहा हैं यह आरोप किसान संग्राम समिति के नेतृत्व में ग्राम पंचायत भादर विकास खण्ड दूबेपुर के नरेगा मजदूरों की मजदूरी का उचित भुगतान न किये जाने के विरोध में तिकोनिया पार्क में चलाया गया है । समिति के महामंत्री विजय कुमार भारती ने मुख्य विकास अधिकारी को मांग पत्र देकर अवगत कराया है कि ग्राम प्रधान व ग्राम पंचायत अधिकारी भादा ने द्वेष भावना से मजदूरों के मजदूरी का भुगतान में भारी अनियमितता बरती है । मॉडल तालाब का निर्माण में लगभग 80-100 मजदूरों ने रोजाना दिहाड़ी पर आठ घंटा प्रतिदिन कार्य किया जिसमें 14 दिन का भुगतान 71.95 प्रतिदिन की दर से 21 दिन का भुगतान 47.00 प्रतिदिन की दर व 17 दिन का भुगतान 29 रू० प्रतिदिन की दर से किया गया और 3 दिन का को‌ई भुगतान नहीं दिया गया । कानपुर देहात में आदर्श तालाब योजना में भी भारी गड़बड़ी पकड़ में आयी है । मानकों को दरकिनार कर निर्माण में लाखों का गोलमाल किया गया है । ताल के किनारे लोहे की बेंच बनवा‌ई गयी ।

लोहा कानपुर की एक फर्म से बिना कोटेशन के ऊंचे दामों पर खरीदा गया ! उसका वजन क्या था? किसके आदेश से ऐसा किया गया? और लोहे की बेंच की आवश्यकता क्यों महसूस हु‌ई? यही नहीं, एक ही तालाब का इस्टीमेट बार-बार बढ़ाया गया । वर्ष 2007-08 में जिसकी लागत 1.95 लाख थी उसे 2009-10 में 6.75 लाख में पूरा किया गया । यह तथ्य मनरेगा को राज्य स्तरीय रोजगार गारंटी परिषद के सदस्य संजय दीक्षित की शिकायत पर राज्य सरकार के आदेश से हु‌ई हैं रिपोर्ट शासन को सौंपी जा चुकी है लेकिन अभी तक कार्रवा‌ई नहीं हु‌ई है । रिपोर्ट में कहा गया है कि सीडी‌ओ जसवंत सिंह ने दबाव डालकर क‌ई बीडी‌ओ तथा अधीनस्थ अधिकारियों को अधिक कीमत पर लोहे की बेंच तथा अन्य सामाग्री खरीदने को मजबूर किया । विरोध करने पर करियर बर्बाद करने तक की धमकी दी गयी । जांच रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि सरवन खेड़ा के मोहाना एवं जसौरा गांवों में आज भी मनरेगा के पैसे की बर्बादी देखी जा सकती है । रसूलाबाद में भी तमाम उदाहरण मिल जायेंगे जहां घपले ही घपले हैं ।

मनरेगा के तहत हो रहे कार्यों में धांधली बदस्तूत जारी है, जबकि केन्द्र सरकार से लेकर राज्य सरकार द्वारा योजना निगरानी में रखे हुये है । इस योजना के लिये विशेषकर प्रदेश में राज्य स्तरीय मनरेगा निगरानी कमेटी की नियुक्‍ति की गयी । लेकिन हाल ही में केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय मनरेगा मानीटरिंग टीम के तहत हुयी जांच से चन्दौली और मिर्जापुर जिले से मनरेगा से जुड़े जो तथ्य सामने निकल कर आया है उसने प्रदेश मनरेगा निगरानी कमेटी पर ही प्रश्न चिन्ह लगा दिया हैं प्रदेश के मुख्यमंत्री मायावती के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद प्रधानों के घर में जॉब कार्डों की थोक में उपलब्धता ये बताती है कि मुख्यमंत्री के आदेश का को‌ई असर नहीं है । ग्राम पंचायत बनौली जनपद मिर्जापुर । बनौली की ग्राम प्रधान इन्द्रावती देवी जिनके पति गणेश आचार्य जिनका बसपा से नाता है । उन्हीं के द्वारा ग्राम प्रधान के सारे कार्य संचालित होते हैं । मानीटरिंग टीम के सदस्यों ने जांच के दौरान ग्राम प्रधान के घर से सैकड़ों जॉबकार्ड जब्त किये । कुछ कार्ड ऐसे भी थे जो एक ही व्यक्‍ति के नाम पर दो दो कार्ड बनाये गये थे । मजे की बात यह है कि इस ग्राम पंचायत की अनियमितता की शिकायत मिर्जापुर के सभी अधिकारियों के संज्ञान में होते हुये भी को‌ई कार्यवाही संबंधित लोगों के खिलाफ नहीं हु‌ई । संभवतः सत्‍तासीन पार्टी नेता होने के वजह से ग्राम प्रधान जिलाधिकारी से लेकर ग्राम सचिव तक के ऊपर दबाव किये है जिससे लाखों शिकायतों के बावजूद किसी अधिकारी ने अभी तक को‌ई कार्यवाही नहीं की है ।

बसही ग्राम पंचायत में भी मानीटरिंग टीम को तमाम गड़बड़ियां मिलीं जिनके बारे में ग्राम प्रधान आरती पाण्डेय को‌ई सही जवाब नही दे सकीं । जमालपुर विकास खण्ड के ग्राम पंचायती में मनरेगा के धन का मन मुताबिक दुरूपयोग हु‌आ । ग्राम बतीला व संघती गांव में जिला चन्दौली भी अपने मनमाफिक नियमों की धज्जियां उड़ाते अपनी मनमानी कर रहे हैं । कार्य बी०डीसी० इरफान करते हैं । बसिला में तालाब पर लाखों रूपये खर्च करने के बावजूद आमजन के लिये उपयोगी सिद्ध नहीं हो सका । इस गांव में तकरीबन डेढ़ वर्ष से जच्चा-बच्चा केन्द्र बनकर तैयार है और अब फर्श और दीवारें टूटने भी लगी हैं । लेकिन अभी तक उक्‍त केन्द्र को स्वास्थ्य विभाग को हस्तानांतरित नहीं किया गया है । इस बिल्डिंग का उपयोग गोबर के उपले रखने में हो रहा है । जॉबकार्ड को लेकर बसिला में जांच टीम को जमकर धांधली मिली इस गाँव में सारे जॉबकार्ड प्रधान व बी०डी०सी० के घर पर ही रहता है । मजदूरों को 100 दिन का काम नहीं मिलता । जॉब कार्ड धारकों में कुछ ऐसे हैं जिनको बगैर मजदूरी किये पैसा मिलता है । संधति गांव में भी निर्मला देवी महिला प्रधान हैं उनके पति सतीश चन्द्र केसरी चूँकि पूर्व ग्राम प्रधान रहे हैं, वही ग्राम प्रधान का सारा कार्यभार देखते हैं उनके कार्यकाल में मनरेगा के तहत विकास कार्यों में गड़बड़ियां पायी गयीं । जांच टीम ने बताया कि एक दिन पूर्व बिछाये गये खड़ंजे के अवलोकन में पाया गया कि खड़ंजे में घटिया ईंटों का प्रयोग किया गया है पदनामपुर का ग्राम प्रधान जो कि दंबग किस्म्‌, का है, ग्राम प्रधान ने अपनी गड़बड़ी छिपाने के लिये सी०डी०ओ०, बी०डी०ओ० के दबाव में उलटा जांच टीम पर पैसा मांगने का आरोप लगाते हुये थाने में तहरीर तक दे डाली । इस प्रकार के जांचों में पाये गये इन तथ्यों से मनरेगा की हकीकत का खुलासा स्पष्ट रूप से सामने आया । इस योजना के तहत किस तरह जिलों के ग्राम प्रधान सचिव से लेकर आला अधिकारियों तक मिलीभगत की कमीशनखोरी चल रही है, जिसकी निगरानी करने वाली निगरानी कमेटी व उसके अधिकारी को‌ई भी कार्यवाही नहीं कर पा रहे हैं । यही हाल सबके सभी जिलों में चल रहा है । शायद इसी धांधली की भनक निगरानी कमेटी व ग्राम विकास विभाग को लग नहीं पा रही है और भनक लग भी रही है तो कार्यवाही में कोताही हो रही है जिससे निचले स्तर पर पदाधिकारी बिना डर के मनमुताबिक मनरेगा संबंध में जांच टीम ने मनरेगा राज्य स्तरीय मानीटरिंग टीम को अपना आरोप पत्र सौंप दिया है ।

मनरेगा के नाम पर घपले का अंत नजर नहीं आ रहा है । कनवर्जन के नाम पर हेराफेरी । नियम है कि जिस विभाग में अपना बजट न हो वहां पर काम मनरेगा से कराया जा‌ए, किन्तु यहां ऐसा नहीं है । विभाग में बजट होने के बावजूद मनरेगा से पैसा लेकर उसे निबटाने का मामला प्रकाश में आया । राज्य गुणवत्ता मानीटर कमेटी के अध्यक्ष विनोद भांकर चौबे ने जांच रिपार्ट में चौंकाने वाले तथ्य प्रकाश में लाये हैं ।

कानपुर देहात में 14 ऐसे विभागों को 15 मार्च 2010 तक के लि‌ए 2.236 लाख की धनराशि मनरेगा से स्वीकृत की गयी जिनके पास अपना लाखों का बजट था । इसमें 796 लाख रूपये पहली किस्त में तथा बाकी अन्य तीन किस्तों में अवमुक्‍त किये गये । क‌ई विकास खंडों में इस धनराशि का उपयोग मिट्‍टी की खोदा‌ई आदर्श तालाबों के निर्माण, सड़क की भरा‌ई आदि में दिखाया गया जबकि स्थलीय निरीक्षण करने पर पता चला कि जहां पर मिट्‌टी का काम दिखाया गया है वहां किसी अन्य योजना में पहले से ही मिट्‌टी का काम हो चुका था । फर्जी मास्टर रोल दिखाकर 4 लाख 13 हजार की धनराशि हड़पने की रिपोर्ट में जिक्र किया गया है । कपराहट ब्लाक में जांच अधिकारी जब वहां पहुंचे तो विभिन्‍न तारीखों में मास्टर रोल पर पचास से अधिक मजदूर ऐसे दिखाये गये जिनका नाम पता फर्जी पाया गया किन्तु उनके नाम पर एक-एक महीने का पैसा निकला हु‌आ दिखाया गया । जांच अधिकारी ने इसमें 30 लाख से अधिक का घपला है ।

प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री दद्‌दू प्रसाद के गृह जनपद चित्रकूट, कर्वी में मनरेगा के तहत घपले बाजी का आलम यह है कि को‌ई कुछ करे लेकिन उसके विरूद्ध कार्यवाही नहीं होती है यदि कभी कार्यवाही हु‌ई तो बाद में लीपा पोती करके बचा दिया गया । जिसका परिणाम यह है कि घपलों पर घपले होते चले जा रहे हैं । मनरेगा चैकडेम में लग रही घटिया सामाग्री मामले में चित्रकूट के जिलाधिकारी ने गंभीरता से भले ही लेते हुये इसकी जांच हेतु अधिशासी अभियंता सिंचा‌ई विभाग प्रखण्ड कर्वीभूमि संरक्षण अधिकारी रामगंगा कामण्ड व अपर अभियंता डी.आर.डी.ए. की टीम गठित की गयी । टीम द्वारा गत 30 अप्रैल को स्थानीय जांच की गयी जिसमें पाया गया कि विकास खण्ड मानिकपुर के अन्तर्गत मारकुण्डी रेन्ज किहुनियां वीट में एक पक्‍का चैकडेम का निर्माण हो रहा था । यह कार्य वित्तीय वर्ष 2009-10 का लागत धनराशि 2 लाख थी । क्षेत्राधिकारी मारकुण्डी वन्य जीव रेन्ज मारकुण्डी चित्रकूट मोनो पर प्राक्‍कलन के कार्य साथ उपस्थित रहे, संबंधित वन क्षेत्राधिकारी द्वारा उक्‍त कार्य से संबंधित ग्राम पुस्तिका, मास्टर रोल व व्यय बा‌उचर के संबंध में बताया कि प्राक्‍कलन आदि कैमूर रनेज मिर्जापुर कार्यालय में है ।

जांच में केस्ट की लम्बा‌ई 10.15 मी०, केस्ट टाप की चौड़ा‌ई 1.50 मी० विगवाल की लम्बा‌ई 8.25 मी० विगवाल की चौड़ा‌ई 0.70 मी० है । वन क्षेत्राधिकारी रानीपुर वन्य जीव विहार (सेंचुरी) ने कार्य का प्राक्‍कलन, व्यय बा‌उचर मौके पर नहीं दिखाये और न ही कार्य प्राक्‍कलन के अनुसार पाया गया । यह कार्य मनरेगा के द्वारा कराया गया कि जानकारी हुयी । विभाग के पास 36 लाख पड़ा है और डेढ़ करोड़ की मांग की गयी है । जब कि विभाग द्वारा पूर्व में कराये गये कार्यों का अभी तक सत्यापन नहीं कराया गया ।

चित्रकूट कर्वी



खजुराहो के दर्शन और वास्तु का स्पष्ट प्रभाव है। मराठे भी इस प्रभाव से अछूते न रहे। राजा छत्रपाल से पेशवा बाजीराव प्रथम को बुंदेलखंड का तिहाई भाग उपहार में मिला तो मराठों ने यहां अपनी जडे जमानी शुरू कीं। मराठों ने बुंदेलखंड में अनेक किलों, बावडियों और मंदिरों का निर्माण कराया किंतु बुंदेलखंड में जिस निर्माण के लिए मराठों को सबसे ज्यादा याद किया जाता है- वह है कर्वी मुख्यालय से पांच किमी दूर बना गणेश बाग का मंदिर। इस मंदिर को खजुराहो की शैली में बनाने की कोशिश की गई है इसीलिए गणेश बाग को मिनी खजुराहो कहा जाता है।

एक खूबसूरत बावडी के किनारे बनाए गए इस दो मंजिला मंदिर की विशेषता इसकी बाहरी दीवारों पर की गई पच्चीकारी है। इस पच्चीकारी में कहीं अपने सात अश्वों के रथ पर सवार सूर्य, कहीं विष्णु हैं तो कहीं अन्य देवसमूह। अगर कुछ नहीं तो मैथुन प्रतिमाएं। संभवत: वास्तुकार खजुराहो की मैथुन प्रतिमाओं के दर्शन से अज्ञात रहा है, अन्यथा उसकी भी नकल करता।

अपनी भव्यता और आकर्षण के बावजूद यह मंदिर पर्यटकों से अछूता है। केवल कुछ धार्मिक अवसरों पर भक्तगण इसकी उपासना करते हैं। खेत-खलिहानों के बीच खडे इस मंदिर से संपूर्ण परिवेश जीवंत हो जाता है। आसपास की हरियाली इसके सौंदर्य में चार चांद लगाती है। यहां का निर्जन वातावरण पंडों-पुरोहितों के खौफ से भी दूर है। आश्चर्य है कि कर्वी का जिला प्रशासन अभी तक इस अमूल्य धरोहर से अनजान क्यों हैं?

कर्वी जिला मुख्यालय से इसकी दूरी महज 4 किलोमीटर है। गणेश बाग से धार्मिक नगरी चित्रकूट दस किलोमीटर है। पर्यटक चित्रकूट के साथ कालिंजर किले का भी आनंद ले सकते हैं जो यहां से 50 किलोमीटर है।

कैसे पहुंचे

कर्वी दिल्ली, झांसी और वाराणसी रेलमार्ग पर स्थित है। गणेश बाग के लिए कर्वी या चित्रकूट रेलवे स्टेशन पर उतरा जा सकता है। चित्रकूट अब हवाई मार्ग से भी जुड गया है। कर्वी इलाहाबाद, वाराणसी और दिल्ली से बस सेवा भी जुडा है। गणेश बाग आने वाले पर्यटक रात्रि विश्राम धार्मिक नगरी चित्रकूट में करना अधिक पसंद करते हैं। वैसे अब कर्वी में भी स्तरीय होटल बन गए